One Message Can Heal
Create Your Sorry Card
SaySorry journal

दूर रहने वाले दादा-दादी को बच्चे का संदेश कैसे लिखवाएं

WhatsApp
दूर रहने वाले दादा-दादी को बच्चे का संदेश कैसे लिखवाएं - Say Sorry

SAYSORRY · प्यार और अपनी बात

अपनी बात अपने शब्दों में रखें

यहां से कोई पंक्ति चुनें, अपनी सच्ची घटना या याद जोड़ें और निजी कार्ड या संदेश की शुरुआत करें।

अपना कार्ड या संदेश बनाएं ↗

दूर रहने वाले दादा-दादी को बच्चे का संदेश भेजते समय सबसे जरूरी चीज सुंदर लिखावट या भावुक शब्द नहीं, बच्चे की अपनी आवाज है। उसके लिए बालकनी का पौधा, आज बना चित्र या खेल में हुआ छोटा बदलाव बड़ी खबर हो सकता है। वयस्क को वह बात साधारण लगे, फिर भी पत्र का विषय वही रहने दें। संदेश बच्चे और दादा-दादी के बीच एक छोटा पुल बन सकता है। उसे अच्छे पोते या अच्छी पोती होने की परीक्षा बनाने से बचें। किसी दिन बच्चा कुछ भेजना न चाहे तो रिश्ता खत्म नहीं हो जाता।

पहले पूछें कि बच्चा क्या भेजना चाहता है

आप शुरुआत में केवल इतना पूछ सकते हैं कि इस हफ्ते की कौन सी बात दादी को बताना चाहोगे। जवाब न आए तो उसकी दिनचर्या से दो या तीन विकल्प याद दिलाएं। तस्वीर, बनाया हुआ खिलौना या कहानी का पसंदीदा पात्र सामने रखने से उसे चुनना आसान लग सकता है। विकल्प देना और उत्तर तय कर देना अलग बातें हैं। यदि वह पौधे की जगह अपना चुटकुला भेजना चाहता है तो वही भेजें। जरूरी नहीं कि हर संदेश में पढ़ाई, उपलब्धि या परिवार की परंपरा का जिक्र हो।

बच्चे से यह भी पूछें कि शब्दों में लिखना अच्छा लगेगा या चित्र के साथ एक पंक्ति जोड़ना। छोटा बच्चा बोल सकता है और वयस्क लिख सकता है। थोड़ा बड़ा बच्चा अपना मसौदा खुद लिखकर केवल वर्तनी की मदद मांग सकता है। जिस सहायता की जरूरत है, उतनी ही दें। यह मत कहें कि दादा जी इतनी दूर हैं, इसलिए पूरा पन्ना लिखना पड़ेगा। दूरी को शब्दों की गिनती से नहीं मापा जा सकता। दो अपनी बातें लिखना उधार के लंबे अनुच्छेद से ज्यादा स्वाभाविक है।

उसकी भाषा सुधारें, भावना तैयार न करें

वयस्क अक्सर संदेश सुंदर बनाने के लिए बच्चे के शब्द बदल देते हैं। आज मैंने बहुत बड़ी बस बनाई को आपके स्नेह की छाया में मेरा रचनात्मक विकास हो रहा है में बदलना बच्चे की आवाज खो देना है। छोटे वाक्य, दोहराव और मजेदार विवरण रहने दें। पढ़ने में अटकाव हो तो पूछकर मामूली सुधार करें। लिखने के बाद बच्चे को पढ़कर सुनाएं और बताएं कि कौन सा शब्द बदला है। अंतिम संदेश उसे अपना लगना चाहिए।

यदि बच्चा कहे कि दादाजी के साथ पिछली बार वाला खेल याद आता है, तो उसे सीधे बहुत याद करता हूं लिखने के लिए मजबूर न करें। वह अपनी भावना घटना के जरिए कह रहा है। बच्चों के अभिव्यक्ति के ढंग अलग हो सकते हैं। किसी और बच्चे की सुंदर चिट्ठी दिखाकर तुलना करना उपयोगी नहीं। आप केवल यह पूछें कि क्या इस बात के साथ कोई सवाल जोड़ना चाहोगे। सवाल न जोड़ना भी ठीक है; हर पत्र का उत्तर खींचना जरूरी नहीं।

दादी, आज मैंने डिब्बे से एक बस बनाई। उसकी खिड़की के पास आपके लिए सीट है। बस अभी चलती नहीं, क्योंकि पहिए टेढ़े हैं। आप छोटी थीं तो क्या बनाती थीं? अगली बार बात होगी तो सुनूंगा।

इस उदाहरण की खासियत कोई तय ढांचा नहीं, बच्चे की छोटी दुनिया का साफ दिखाई देना है। इसे ज्यों का त्यों लिखवाने के बजाय अपने बच्चे का असली विवरण आने दें। उसकी बस की जगह कागज का घर, पसंदीदा गीत या गली का पेड़ हो सकता है। जिस अनुभव में उसकी दिलचस्पी नहीं है, केवल बड़ों को खुश करने के लिए उसे जोड़ने की जरूरत नहीं।

संदेश का ऐसा रूप चुनें जिसे दोनों इस्तेमाल कर सकें

बच्चे को ध्वनि संदेश भेजना आसान लग सकता है, जबकि दादा-दादी को उसे खोलने में मदद चाहिए हो। किसी को छोटे अक्षर पढ़ने में परेशानी होती है तो किसी को लंबी रिकॉर्डिंग सुनना सुविधाजनक नहीं लगता। अनुमान लगाने के बजाय पूछ लें। पत्र की फोटो साफ हो, संदेश बहुत तेज न बोला गया हो और उत्तर भेजने का तरीका सरल हो। तकनीकी व्यवस्था बच्चे से करवाकर फिर गलती होने पर नाराज होना उचित नहीं। जो हिस्सा वयस्क संभाल सकता है, वह खुद संभाले।

कागज की चिट्ठी भेजना चाहें तो बच्चे को लिफाफे का अर्थ समझाना भी गतिविधि हो सकती है, लेकिन पता और डाक की व्यवस्था बड़े की जिम्मेदारी रखें। संदेश पहुंचने में समय लगे तो साफ बताएं। तुरंत जवाब न आने पर बच्चा यह न माने कि उसकी बात पसंद नहीं आई। आप कह सकते हैं कि अभी मालूम नहीं उन्होंने कब पढ़ा, अगली सामान्य बातचीत में पूछ लेंगे। बिना जानकारी के यह वादा न करें कि कल तक जवाब जरूर आएगा।

निजी बातें भेजने से पहले बच्चे से पूछें

स्कूल की मुश्किल, दोस्त से झगड़ा, डर या किसी निजी आदत को वयस्क अक्सर प्यारी पारिवारिक खबर मानकर जोड़ देते हैं। बच्चे की जानकारी उसके लिए संवेदनशील हो सकती है। वह बात आपसे साझा करता है, इसलिए उसे दादा-दादी को बताना जरूरी नहीं हो जाता। संदेश भेजने से पहले पूरा पाठ और चुनी गई फोटो उसे दिखाएं। उम्र के अनुसार समझाएं कि यह किसे जाएगा और क्या इसे परिवार के समूह में भी भेजना है।

अनुमति केवल संदेश भेजने तक सीमित भी हो सकती है। बच्चा दादी को चित्र दिखाना चाहता है, पूरे रिश्तेदार समूह को नहीं। दादा-दादी से विनम्रता से कहें कि आगे भेजने से पहले पूछें। स्कूल की पहचान, दूसरे बच्चों की तस्वीर या किसी और की बात जोड़ने में भी ध्यान दें। यह सावधानी रिश्ते में दूरी पैदा करने के लिए नहीं, भरोसा बनाए रखने के लिए है। बच्चा देखता है कि उसकी कही बात का उपयोग पूछकर होता है तो अगली बार अपना विषय चुनने की गुंजाइश समझता है।

भावनाओं की जिम्मेदारी बच्चे पर न डालें

दादी अकेली पड़ जाती हैं, तुम लिखोगे तभी खुश होंगी जैसा वाक्य बच्चे पर बड़ा भावनात्मक काम डाल देता है। वह प्यार से संदेश भेज सकता है, पर किसी वयस्क की उदासी संभालना उसकी जिम्मेदारी नहीं है। वयस्कों के हालचाल, सहयोग और नियमित संपर्क की अपनी व्यवस्था रखें। बच्चे की चिट्ठी उस व्यवस्था का विकल्प नहीं होनी चाहिए। पत्र न लिखने पर दादा-दादी का प्यार कम हो जाएगा, ऐसा संकेत भी न दें।

यदि बच्चा नाराज है क्योंकि पिछली बातचीत में उसकी बात काट दी गई थी, तो केवल अच्छे शब्द लिखवाकर समस्या ढकना ठीक नहीं। पहले उसकी बात सुनें। हो सकता है वह कुछ समय बाद बात करना चाहे या छोटा संदेश भेजकर अपनी जरूरत बताए। सम्मानजनक शब्द चुनने में मदद कर सकते हैं, जैसे पिछली बार अपनी कहानी पूरी नहीं बता पाया, अगली कॉल में थोड़ी देर सुनेंगे। बड़ों के प्रति आदर का अर्थ बच्चे की असुविधा छिपाना नहीं है।

जवाब को नए प्रदर्शन में न बदलें

दादा-दादी लंबा उत्तर दें तो बच्चे को पूरा ध्यान लगाकर तुरंत जवाब देने का आदेश न दें। पढ़कर सुनाने का समय तय किया जा सकता है। उसे कोई हिस्सा मजेदार लगे तो उस पर बात होने दें। वे केवल आशीर्वाद या छोटा हालचाल भेजें तो भी उसे कम अपनापन का प्रमाण न बनाएं। उनके संवाद की आदत अलग हो सकती है। दोनों पक्षों को एक जैसे उत्साह या शब्दों में प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है।

एक हल्का सिलसिला बनाना चाहें तो महीने में कभी चित्र भेजने या छुट्टी में छोटी बातचीत का विकल्प रख सकते हैं। इसे कठोर सूची न बनाएं। बच्चे की उम्र, रुचि और कार्यक्रम बदलेंगे। आज पौधे का चित्र भेजने वाला बच्चा अगले महीने सिर्फ कोई आवाज सुनाना चाहेगा। पुराने संदेश याद के लिए रखना हो तो उसकी इच्छा भी पूछें। रिश्ता तब सहज रहता है जब संदेश भेजना एक उपलब्ध रास्ता हो, हर बार निभाना पड़ने वाला भावनात्मक कर्तव्य नहीं।

आगे पढ़ने के लिए

Make the words your own.

Add your real details to a personal message.

Create your sorry card